“अहंकार की आग, समर्पण की राख: जब दक्ष ने अपमानित किया भगवान शिव को”

कभी-कभी सबसे बड़े भक्त भी अभिमान के शिकार कैसे हो जाते हैं? क्यों अहंकार अक्सर धर्म और मर्यादा का मुखौटा पहन लेता है? और कैसे दिव्य सत्य, परंपराओं और प्रतिष्ठा…

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भाग 6: मुक्ति का तेज – देवहूति की अंतिम आरोहण यात्रा

वन शांत था, एक स्वर्णिम नीरवता में लिपटा हुआ। भगवान कपिल और उनकी माता देवहूति के बीच चल रहा पावन संवाद अपने दिव्य शिखर पर पहुँच चुका था। उनके वचन…

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