भाग 6: मुक्ति का तेज – देवहूति की अंतिम आरोहण यात्रा

वन शांत था, एक स्वर्णिम नीरवता में लिपटा हुआ। भगवान कपिल और उनकी माता देवहूति के बीच चल रहा पावन संवाद अपने दिव्य शिखर पर पहुँच चुका था। उनके वचन…

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भाग 5: गर्भ में आत्मा का क्रंदन – एक भूली हुई प्रार्थना

आश्रम की शांति में, केवल कपिल भगवान की मधुर वाणी ही वह पवित्र निस्तब्धता भंग कर रही थी, जब वे अपनी माता देवहुति को दिव्य उपदेश सुना रहे थे। देवहुति…

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