जब अहंकार जला… और करुणा ने सृष्टि को फिर से रचा: दक्ष यज्ञ की कथा

क्या आपने कभी सोचा है कि सब कुछ “सही” करने के बाद भी जीवन क्यों बिखर जाता है?क्यों वर्षों की “अच्छी नीयत” के बावजूद परिवार टूट जाते हैं?क्यों रीति-रिवाज़, पद,…

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“सती की अग्नि: जब अहंकार प्रेम को जला देता है… और प्रेम मुक्ति बन जाता है”

हमारी प्राचीन परंपरा में कुछ कहानियाँ ऐसी हैं,जो हमें सिर्फ कुछ सिखाती नहीं—बल्कि हिला देती हैं, जगा देती हैं। यह भी ऐसी ही एक कहानी है। प्रेम और अहंकार की…

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